2025 का खरीदी सत्र हिमाचल प्रदेश के सेब किसानों के लिए अच्छी खबर लेकर आया है। Adani Agri Fresh Limited (AAFL) ने इस बार Premium (LMS ग्रेड) सेब की शुरुआती दर ₹85 प्रति किलो घोषित की है, जो पिछले वर्ष की दर से ₹5 अधिक है
आइए विस्तार से समझते हैं कि यह कदम क्यों महत्वपूर्ण है, इसके क्या प्रभाव हैं, और पूरे क्षेत्र में इसका असर कैसे दिखेगा।
1. खरीद का आगाज़: समय और स्थान
AAFL ने इस वर्ष की सेब खरीद का रास्ता तय कर दिया है:
- 24 अगस्त से खरीद Rohru, Rampur और Tutu-Pani में
- 25 अगस्त को Sainj और Jarol-Tikkar में
- 28 अगस्त से Reckong-Peo में शुरू होगी।
इस व्यवस्थित शुरुआत से स्पष्ट है कि इस बार कंपनी एक व्यापक और योजनाबद्ध अभियान चला रही है।
2. ग्रेडिंग और दरें: क्यों अलग हैं आज
AAFL ने विभिन्न ग्रेड के सेब की दरें इस प्रकार तय की हैं:
- Premium (80–100% रंग):
- Extra Large (EL): ₹45/kg
- Large-Medium-Small (LMS): ₹85/kg
- Extra Small (ES): ₹75/kg
- Extra Extra Small (EES): ₹65/kg
- PITTU (बहुत छोटे): ₹45/kg
- Supreme (60–80% रंग):
- EL: ₹35/kg
- LMS: ₹65/kg
- ES: ₹55/kg
- EES: ₹45/kg
- PITTU: ₹35/kg
- Below 60% रंग (सभी साइज, EEL छोड़कर): ₹24/kg
- ROL (रिजेक्टेड) सेब: ₹24/kg
- Undersized (EEL या US): ₹20/kg
यह दर संरचना न सिर्फ गुणवत्ता के अनुसार उचित मूल्य सुनिश्चित करती है, बल्कि किसानों को प्रेरित भी करती है कि वे उच्च गुणवत्तावाले फल दे।
3. किसानों के लिए राहत: मूल्य और पारदर्शिता
खुला बाजार इस समय कम दरों के साथ उतार-चढ़ाव देख रहा है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई थी। इसके विपरीत, AAFL की नई दरें एक स्थिर प्रारंभिक मूल्य प्रदान करती हैं जो किसानों को बेहतर राहत देती हैं
सरकारी और निजी मंडियों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ी तो आने वाले दिनों में और बेहतर दरों की उम्मीद बनती है।
4. डिजिटल मंडी: पारदर्शिता और दक्षता
अगस्त 2025 में AAFL ने भारत की पहली डिजिटल सेब मंडी का पायलट लॉन्च किया, जो Bithal (Rampur के पास, शिमला से लगभग 120 किमी) में स्थापित है।
यह मंच किसानों को सीधे खरीदारों से जोड़ता है, जिससे बीच की दलाली खत्म होती है, रियल-टाइम बाजार दर मिलती है, और भुगतान सरल होता है।
कई किसान इससे काफी संतुष्ट दिखे हैं—उन्हें अब मंडियों में घूमने की आवश्यकता नहीं, और कीमतों में पारदर्शिता मौजूद है
5. हिमाचल में सेब अर्थव्यवस्था: कुछ अहम आंकड़े
- हिमाचल में कुल कृषियोग्य भूमि: 11 लाख हेक्टेयर
- फलों की खेती: लगभग 2 लाख हेक्टेयर, जिसमें सेब का हिस्सा: 1 लाख हेक्टेयर (लगभग 50%)
- वार्षिक सेब उत्पादन: लगभग 5.5 लाख मीट्रिक टन
- राज्य की सेब अर्थव्यवस्था में योगदान: ₹5,500 करोड़ से अधिक
6. AAFL की भूमिका: पशोपेश के बिना समर्थन
AAFL वर्तमान में हिमाचल प्रदेश के सेब उत्पादन का लगभग 8% हिस्सा हासिल करता है।
Farm-Pik ब्रांड के तहत कंपनी ने स्टोरेज और मार्केटिंग को संगठित किया है। 2006 से उन्होंने Controlled Atmosphere (CA) स्टोरेज सुविधाएँ विकसित की हैं, जिनकी कुल क्षमता 22,400 MT है—स्थान: Bithal, Sainj और Mehandli (Rohru क्षेत्र)।
इसके अलावा, कंपनी ने देशभर में 76 थोक और 1,500 रिटेल आउटलेट्स का वितरण नेटवर्क बनाया है, साथ ही आधुनिक रिटेल चैनल भी जोड़े हैं।
7. स्पष्ट असर: किसानों को फायदा, बाजार को उम्मीद
- मजूबत लागत मूल्य – ₹85/kg की शुरुआती दर से किसानों को लागत और लाभ दोनों मिलता है।
- डिजिटल मंडी से बाजार तक सीधी पहुँच – दलालों के बिना सीधे लेन-देन से पारदर्शिता।
- उत्पादन गुणवत्ता पर जोर – बेहतर ग्रेड सेब देने की प्रेरणा।
- मंडी भावों में ऊपर की ओर दबाव – यह शुरुआती मूल्य ओपन मार्केट में रुझान बदल सकता है।
8. आने वाला समय: संभावित रुझान
सितंबर-अक्टूबर के दौरान जब खरीदी चरम पर होगी, तब:
- मंडियों में और सुधार संभव है अगर मांग अधिक रहे।
- डिजिटल बिक्री प्लेटफॉर्म को विस्तार मिलने की संभावनाएं।
- AAFL की खरीद क्षमता और नेटवर्क विस्तार से उनका हिस्सा बढ़ सकता है (>8%)।
- अन्य निजी कंपनियाँ भी प्रतिस्पर्धा में सक्रिय हो सकती हैं, जिससे किसानों को और लाभ मिल सकता है।
निष्कर्ष
2025 की सेब खरीदी सत्र की शुरुआत Adani Agri Fresh द्वारा एक सकारात्मक कदम रही है। बेहतर शुरुआती दर, डिजिटल पारदर्शिता, और मजबूत बुनियादी ढांचे ने किसानों के लिए नए आय के अवसर खोले हैं। हिमाचल प्रदेश की सेब अर्थव्यवस्था को इस पहल से स्थिरता और विकास की दिशा मिलेगी, और आने वाले वर्षों में इससे पूरे क्षेत्र को व्यापक फायदा होगा।