भूमिका
साल 2025 भारत के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में ऐतिहासिक साबित हो रहा है। एक तरफ दुनिया की दिग्गज टेक कंपनियां भारत में निवेश और विस्तार कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकार भी IndiaAI Mission के ज़रिए विशाल कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटा प्लेटफ़ॉर्म और सुरक्षित AI इकोसिस्टम तैयार करने में लगी है। इसी कड़ी में OpenAI ने भी भारत में अपना पहला दफ़्तर दिल्ली में खोलने का ऐलान किया है।
इस तरह भारत न केवल दुनिया का सबसे बड़ा AI उपभोक्ता बाज़ार बन रहा है, बल्कि स्टार्टअप, शिक्षा और अनुसंधान के ज़रिए एक वैश्विक AI battleground के रूप में उभर रहा है।
OpenAI का भारत में बड़ा दांव
OpenAI ने 2025 को भारत में अपने विस्तार का साल बना दिया है। कंपनी ने ऐलान किया है कि वह इस साल नई दिल्ली में अपना पहला दफ़्तर खोलेगी।
- भारत OpenAI के लिए दूसरा सबसे बड़ा बाज़ार बन चुका है।
- कंपनी ने भारतीय यूज़र्स के लिए ChatGPT Go नामक नया वर्ज़न ₹399/महीना की कम कीमत पर लॉन्च किया है, जिसमें UPI पेमेंट सिस्टम भी इंटीग्रेट किया गया है।
- पिछले एक साल में भारत में ChatGPT का इस्तेमाल चार गुना बढ़ चुका है।
शिक्षा के क्षेत्र में भी OpenAI ने बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने आईआईटी मद्रास को लगभग ₹4.5 करोड़ का रिसर्च ग्रांट दिया है और 5 लाख छात्रों व शिक्षकों को फ्री ChatGPT लाइसेंस उपलब्ध कराए हैं। यह दिखाता है कि OpenAI भारत को केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि नवाचार और अनुसंधान का केंद्र मान रहा है।
IndiaAI Mission: सरकार का बड़ा विज़न
भारत सरकार ने 2024 में IndiaAI Mission को मंज़ूरी दी थी, और 2025 में इसका असर तेज़ी से दिख रहा है। इस मिशन के ज़रिए सरकार का मक़सद है कि भारत दुनिया के अग्रणी AI राष्ट्रों की कतार में खड़ा हो।
इस मिशन के सात बड़े स्तंभ हैं:
- Compute Infrastructure – 10,000 से अधिक GPUs की उपलब्धता, जिसमें Nvidia और AMD जैसे बड़े चिप निर्माताओं का सहयोग शामिल है।
- Datasets Platform (AIKosha) – एक राष्ट्रीय स्तर का डेटा प्लेटफ़ॉर्म, जहां से स्टार्टअप और रिसर्चर ट्रेनिंग के लिए डेटा ले सकते हैं।
- FutureSkills – युवाओं और छात्रों को AI तकनीक में ट्रेनिंग और स्किल डेवलपमेंट।
- Application Development – लोकल और इंडस्ट्री-फ़्रेंडली AI एप्लीकेशन को बढ़ावा।
- Startup Financing & Innovation Challenge – घरेलू स्टार्टअप्स को सीधी सहायता।
- Safe & Trusted AI – AI को सुरक्षित और नैतिक बनाने के लिए रेगुलेटरी फ्रेमवर्क।
- Sarvam AI जैसे Indigenous Models – भारतीय भाषाओं में AI मॉडल तैयार करना।
विशेष बात यह है कि Sarvam AI को सरकार ने 4000 GPUs छह महीने के लिए उपलब्ध कराए हैं ताकि वह भारत का पहला स्थानीय फाउंडेशनल मॉडल तैयार कर सके। यह मॉडल भारतीय भाषाओं और देश की ज़रूरतों के हिसाब से ट्रेन किया जाएगा।
विदेशी निवेश और कॉर्पोरेट दुनिया का भरोसा
भारत के AI सफर को तेज़ करने में केवल सरकार या स्टार्टअप ही नहीं, बल्कि वैश्विक कंपनियां भी अपनी पूंजी लगा रही हैं।
- Amazon Web Services (AWS) ने घोषणा की है कि वह 2030 तक भारत में क्लाउड और AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर लगभग $12.7 बिलियन का निवेश करेगी।
- दुनिया की कई बड़ी कंपनियां जैसे McDonald’s, Tesco और Bupa भारत में अपने Global Capability Centres (GCCs) के ज़रिए AI रिसर्च और इनोवेशन कर रही हैं।
पहले भारत को आउटसोर्सिंग और कम लागत वाले कामों का हब माना जाता था, लेकिन अब हालात बदल रहे हैं। बहुराष्ट्रीय कंपनियां भारत को एक इनोवेशन हब मानकर यहां नए AI समाधान विकसित कर रही हैं।
स्टार्टअप इकोसिस्टम और Soonicorns Summit 2025
भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम भी AI के क्षेत्र में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। हाल ही में आयोजित ET Soonicorns Summit 2025 में AI पर गहन चर्चा हुई।
- इस समिट में यह मुद्दा उठा कि क्या AI नौकरियों के लिए ख़तरा है या नए अवसर खोलेगा।
- Pratilipi, Zolve, Stellaris और Google DeepMind जैसे स्टार्टअप्स और कंपनियों ने बताया कि वे कैसे AI को स्केल कर रहे हैं।
- भारत में “भारत का ChatGPT” बनाने की कोशिशें भी इसी मंच पर चर्चा का हिस्सा बनीं।
इस तरह की घटनाएं यह साफ़ करती हैं कि भारत का AI स्टार्टअप इकोसिस्टम न केवल घरेलू स्तर पर, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अपनी जगह बना रहा है।
निष्कर्ष
भारत 2025 में एक ऐसा देश बनकर उभरा है जहां AI का भविष्य लिखा जा रहा है।
- OpenAI जैसे दिग्गज यहां आकर निवेश कर रहे हैं।
- सरकार IndiaAI Mission के तहत मज़बूत नींव तैयार कर रही है।
- विदेशी निवेशक और कॉर्पोरेट सेक्टर भारत को AI इनोवेशन हब मान रहे हैं।
- और स्टार्टअप्स अपनी रचनात्मकता से वैश्विक मंच पर नाम कमा रहे हैं।
यानी आने वाले समय में भारत न केवल AI का उपभोक्ता रहेगा, बल्कि एक वैश्विक नेता के रूप में सामने आएगा।