भारत में शिक्षा व्यवस्था लगातार डिजिटल हो रही है। पहले बच्चों के दाखिले और पढ़ाई से जुड़े काम सिर्फ ऑफलाइन होते थे, लेकिन अब सरकार और शिक्षा विभाग ने स्कूली पोर्टल के ज़रिए पूरी व्यवस्था ऑनलाइन कर दी है। इस पोर्टल की सबसे बड़ी पहल है – मुफ्त बायोमैट्रिक पहचान जोड़ना, जिससे हर छात्र का यूनिक रिकॉर्ड तैयार होगा। यह पहचान न केवल बच्चों के अकादमिक जीवन को सुरक्षित बनाएगी बल्कि उन्हें मिलने वाले सरकारी लाभ सीधे पहुंचेंगे।
आज हम इस आर्टिकल में विस्तार से समझेंगे कि स्कूली पोर्टल से मुफ्त बायोमैट्रिक पहचान जोड़ने का क्या महत्व है, इसका उद्देश्य क्या है और कैसे रजिस्ट्रेशन करें।
स्कूली पोर्टल क्या है?
स्कूली पोर्टल एक ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म है जिसे राज्य और केंद्र सरकारें मिलकर चलाती हैं। इस पोर्टल का मुख्य उद्देश्य छात्रों की शिक्षा, प्रवेश, उपस्थिति, परीक्षा परिणाम, छात्रवृत्ति और अन्य सुविधाओं को एक डिजिटल सिस्टम से जोड़ना है।
- यह पोर्टल छात्रों का डिजिटल रिकॉर्ड रखता है।
- बच्चों की जानकारी अभिभावक, स्कूल प्रशासन और शिक्षा विभाग – तीनों तक एक साथ पहुँचती है।
- अब इसमें बायोमैट्रिक पहचान जोड़ दी गई है, ताकि हर छात्र का एक यूनिक डेटा मौजूद हो।
बायोमैट्रिक पहचान क्या है?
बायोमैट्रिक पहचान का मतलब है – छात्र की ऐसी पहचान जिसे कोई डुप्लीकेट या नकली नहीं बना सकता। यह पहचान फिंगरप्रिंट, आँखों की पुतली (iris scan), और चेहरे की स्कैनिंग जैसी आधुनिक तकनीक से की जाती है।
- यूनिक फिंगरप्रिंट से छात्र की उपस्थिति दर्ज होगी।
- आईरिस स्कैन से पहचान और भी मजबूत होगी।
- यह डेटा सुरक्षित सर्वर पर स्टोर किया जाएगा, ताकि भविष्य में कभी भी सरकारी योजनाओं या स्कॉलरशिप में धोखाधड़ी न हो।
यह पहल कब और क्यों शुरू की गई?
सरकार ने यह कदम इसलिए उठाया ताकि:
- स्कूलों में फर्जी एडमिशन को रोका जा सके।
- बच्चों को मिलने वाली स्कॉलरशिप और सरकारी योजनाओं का लाभ सही लाभार्थियों तक पहुंचे।
- हर छात्र का एक यूनिक शैक्षणिक प्रोफ़ाइल बने।
- शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाया जा सके।
इस योजना की शुरुआत 2024-25 शैक्षणिक सत्र से की गई और अब इसे पूरे देश में लागू किया जा रहा है।
स्कूली पोर्टल पर बायोमैट्रिक पहचान जोड़ने के फायदे
इस योजना से छात्रों और अभिभावकों को कई तरह के लाभ मिलेंगे।
- सटीक उपस्थिति रिकॉर्ड – बच्चे की उपस्थिति सीधे फिंगरप्रिंट से दर्ज होगी।
- डुप्लीकेट एडमिशन रोके जाएंगे – एक बच्चा केवल एक ही स्कूल में नामांकन करा सकेगा।
- छात्रवृत्ति सीधे खाते में – छात्रवृत्ति और योजनाओं का लाभ सीधे बच्चों के खाते में जाएगा।
- डिजिटल रिपोर्ट कार्ड – बच्चे की पढ़ाई का पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन रहेगा।
- सरकारी योजनाओं का लाभ – जैसे मुफ्त साइकिल, यूनिफ़ॉर्म, किताबें – सभी का रिकॉर्ड बायोमैट्रिक से जुड़ा होगा।
स्कूली पोर्टल पर बायोमैट्रिक रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया
Step 1: पोर्टल पर लॉगिन करें
- सबसे पहले स्कूली पोर्टल की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।
- “स्टूडेंट रजिस्ट्रेशन” ऑप्शन पर क्लिक करें।
Step 2: बच्चे की बेसिक जानकारी भरें
- बच्चे का नाम, जन्मतिथि, कक्षा, स्कूल का नाम और अभिभावक का नाम भरें।
Step 3: बायोमैट्रिक विवरण अपलोड करें
- बच्चे का फिंगरप्रिंट स्कैन करें।
- आईरिस स्कैन या चेहरा पहचान (Face ID) सिस्टम में डालें।
Step 4: दस्तावेज़ अपलोड करें
- आधार कार्ड
- स्कूल आईडी
- जन्म प्रमाण पत्र
- अभिभावक का पहचान पत्र
Step 5: वेरिफिकेशन और सबमिट
- सबमिट करने के बाद सिस्टम से OTP आएगा।
- वेरिफिकेशन पूरा होते ही बच्चे की बायोमैट्रिक पहचान जुड़ जाएगी।
किन दस्तावेज़ों की ज़रूरत होगी?
- आधार कार्ड (बच्चे और अभिभावक का)
- स्कूल आईडी
- पासपोर्ट साइज फोटो
- जन्म प्रमाण पत्र
- मोबाइल नंबर (OTP वेरिफिकेशन के लिए)
यह पहचान बच्चों की ज़िंदगी में क्या बदलाव लाएगी?
- डिजिटल सुरक्षा – अब बच्चों की जानकारी पूरी तरह सुरक्षित होगी।
- भविष्य के लिए आधार – यह डेटा आगे चलकर कॉलेज और प्रतियोगी परीक्षाओं में भी काम आएगा।
- पारदर्शिता – सरकारी लाभ सीधे असली छात्र तक पहुंचेगा।
- शैक्षणिक ट्रैकिंग – सरकार हर छात्र की प्रगति को ट्रैक कर पाएगी।
राज्यों में लागू होने की स्थिति
- उत्तर प्रदेश – सभी सरकारी स्कूलों में शुरू।
- मध्य प्रदेश – स्कूली पोर्टल से जोड़ दिया गया है।
- राजस्थान – पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर चल रहा है।
- अन्य राज्य – धीरे-धीरे सभी राज्यों में लागू किया जा रहा है।
निष्कर्ष
स्कूली पोर्टल पर बच्चों की मुफ्त बायोमैट्रिक पहचान जोड़ना एक क्रांतिकारी पहल है। इससे न केवल शिक्षा व्यवस्था डिजिटल और पारदर्शी होगी बल्कि छात्रों की ज़िंदगी भी सुरक्षित और आसान बनेगी। माता-पिता को चाहिए कि वे जल्द से जल्द अपने बच्चों का रजिस्ट्रेशन करवाएं, ताकि आने वाले समय में किसी भी योजना या सुविधा का लाभ लेने में दिक्कत न हो।
👉 अब हर बच्चे का डिजिटल रिकॉर्ड, सरकारी लाभ और शैक्षणिक भविष्य – सब कुछ एक ही जगह सुरक्षित होगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
Q1. क्या बायोमैट्रिक रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है?
हाँ, सरकारी और मान्यता प्राप्त स्कूलों में यह ज़रूरी किया गया है।
Q2. क्या इसके लिए कोई शुल्क लगेगा?
नहीं, यह पूरी तरह मुफ्त है।
Q3. क्या प्राइवेट स्कूलों में भी लागू होगा?
हाँ, धीरे-धीरे सभी स्कूलों को जोड़ने की योजना है।
Q4. अगर बच्चे का आधार नहीं बना है तो क्या करें?
पहले आधार बनवाना होगा, तभी बायोमैट्रिक रजिस्ट्रेशन हो पाएगा।
Q5. क्या डेटा सुरक्षित रहेगा?
हाँ, सरकार ने डेटा प्रोटेक्शन कानून के तहत सुरक्षा का प्रावधान किया है।
Q6. क्या बच्चे का बायोमैट्रिक बदल सकता है?
नहीं, फिंगरप्रिंट और आईरिस स्कैन यूनिक रहते हैं।
Q7. क्या अभिभावक भी स्कूली पोर्टल पर लॉगिन कर सकते हैं?
हाँ, पेरेंट्स लॉगिन के ज़रिए बच्चे की जानकारी देख सकते हैं।
Q8. क्या पुराने छात्रों को भी रजिस्ट्रेशन कराना होगा?
हाँ, यह सभी बच्चों के लिए लागू है।
Q9. क्या यह पहचान भविष्य की परीक्षाओं में भी काम आएगी?
हाँ, सरकार इसे बोर्ड और प्रतियोगी परीक्षाओं से भी जोड़ सकती है।
Q10. क्या इंटरनेट के बिना यह संभव है?
नहीं, रजिस्ट्रेशन के लिए इंटरनेट अनिवार्य है।